भारती माँ के उपासक

भारती मां के उपासक मातृ मंदिर के पुजारी


भारती मां के उपासक मातृ मंदिर के पुजारी
कर रहे मां को समर्पित, संगठन की शक्ति सारी

राष्ट्र अपना घिर रहा है, संकटों के बादलों से,
युद्धरत आतंकवादी, देश के रक्षा बलों से,
संगठित सामर्थ्य बल से, चोट दे अरि को करारी।।

शील है संबल हमारा, इसलिए दुर्जेय है हम,
शौर्यमय गाथा हमारी, ज्ञान गीता श्रेष्ठ हैं हम,
प्राण की बाती जलाकर, आरती मां की उतारी।

भरत भू के पुत्र सारे, जाति बंधन मुक्त होकर,
जीत ले विश्वास सबका, स्नेहा श्रद्धा युक्त होकर,
बुद्ध नानक जैन वैदिक, हम सनातन धर्म धारी।।



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विश्व गुरु तब अर्चना में



विश्व गुरु तब अर्चना में, भेंट अर्पण क्या करें ।
जबकि तन मन धन तुम्हारे, और पूजन क्या करें ।।

प्राची की अरुणिमा छटा है, यज्ञ की आभा विभा है,
अरुण ज्योतिर्मय ध्वजा है, दीप दर्शन क्या करें।।

वेद की पावन ऋचा से, आज तक जो राग गूंजे,
वन्दना  के उन स्वरों में, तुच्छ वंदन क्या करें।।

राम के अवतार आए, कर्म मय जीवन चलाएं
अजिर तन तुझको चढ़ाएं, और अर्चन क्या करें।।

पत्र फल और पुष्प जल से, भावना ले हृदय तल से,
प्राण के पल पल  विपल से, आज आराधन करें।।

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युग परिवर्तन की बेला में

                  युग परिवर्तन की बेला में, हम सब मिलकर साथ चलें


युग परिवर्तन की बेला में, हम सब मिलकर साथ चलें,
देश धर्म की रक्षा के हित, सहते सब आघात चलें,
मिलकर साथ चलें, मिलकर साथ चलें।।

शौर्य पराक्रम की गाथाएं, भरी पड़ी है इतिहास में,
परंपरा के चिर उननायक, जिए निरंतर संघर्षों में,
हृदयों में उस राष्ट्र प्रेम के, लेकर हम तूफान चलें।
 मिलकर साथ चलें, मिलकर साथ चलें।।

कलयुग में संगठन शक्ति ही, जागृति का आधार बनेगी, 
एक सूत्र में पिरो सभी को, सपने सब साकार करेगी,
संस्कृति के पावन मूल्यों की, लेकर हम सौगात चलें।
 मिलकर साथ चलें, मिलकर साथ चलें।।

ऊंच-नीच का भेद मिटाकर, समरस जीवन को सरसायें,
फैलाकर आलोक ज्ञान का, परा शक्तियों को प्रकटायें,
नीविड निशा की काट कालिमा, लाने नवल प्रभात चलें।
 मिलकर साथ चलें, मिलकर साथ चलें।।

अडिग हमारी निष्ठा उर में, लक्ष्य प्राप्ति की तड़पन मन में,
तन-मन-धन सब अर्पण करने, संघ मार्ग के दुष्कर रण में, 
केशव के शाश्वत विचार को, ध्येय मान दिन-रात चलें।
मिलकर साथ चलें मिलकर साथ चलें।।

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