मन मस्त फकीरी धारी है



मन मस्त फकीरी धारी है 

मन मस्त फकीरी धारी है 
अब एक ही धुन जय जय भारत 
जय जय भारत जय जय भारत ।।

हम धन्य हैं इस जग जननी की,
 सेवा का अवसर है पाया,
इसकी माटी वायु जल से,
 दुर्लभ जीवन है विकसाया,
यह पुष्प इसी के चरणों में,
 मां प्राणों से भी प्यारी है ।।१।।

सुंदर सपने में आकर्षण,
 सब तोड़ चले मुख मोड़ चले,
वैभव महलों का क्या करना,
 सोते सुख से आकाश तले,
साधन की ओर न ताकेंगे,
 कांटो की राह हमारी है ।।२।।

ऋषि मुनियों संतो का तप,
 अनमोल हमारी थाती है,
बलिदानी वीरों की गाथा,
 अपने रग रग लहराती है,
गौरवमय नव इतिहास रचे,
 अब अपनी ही तो बारी है ।।३।।





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निज गौरव को निज वैभव को


निज गौरव को निज वैभव को

निज गौरव को निज वैभव को, 
क्यों हिन्दू बहादुर भूल गए
उपदेश दिया जो गीता में,
क्यूं सुनना सुनाना भूल गए ।।

रावण ने सीता चुराई थी,
 हनुमान ने लंका जलाई थी ।
अब लाखों सीते हरी गई,
 क्यों लंका जलाना भूल गए ।।१।।

कान्हा ने रास रचाया था,
 दुष्टों पर चक्र चलाया था
अब रास रचाना याद रहा,
 क्यूं चक्र चलाना भूल गए ।।२।।

गीता का ज्ञान कराया था,
 अर्जुन को वीर बनाया था, 
बंसी का बजाना याद रहा,
 क्यूं वीर बनाना भूल गए ।।३।।

राणा ने राह बनाई थी,
 शिवराज ने भी अपनाई थी,
जिस राह पर बंदा वीर चले,
 उस राह पे चलना भूल गए।।४।।

केशव का भी उपदेश यही,
 माधव का भी संदेश यही,
जिस मां की गोद में जन्म लिया,
 क्यूं मान बढ़ाना भूल गए ।।५।।
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भारत माता तेरा आंचल



भारत माता तेरा आंचल


भारत माता तेरा आंचल, हरा भरा धानी धानी ।
मीठा-मीठा चमचम करता, तेरी नदियों का पानी।।
हरी हो गई बंजर धरती नाचे चरणों में बिजली
सोना चांदी उगल रहा है तेरी नदियों का पानी।।१।।
भारत माता तेरा आंचल ......
तेरा मान बढ़ाने वाले, तेरे घर के हैं रखवाले ।
तेरे ऊंचे ऊंचे पर्वत, निडर बहादुर सेनानी ।।२।।
भारत माता तेरा आंचल ......
मस्त हवा जब लहर आती है, दूर-दूर तक पहुंचाती है
जग को मीत बनाने वाली, मधुर मधुर तेरी वाणी ।।३।।
भारत माता तेरा आंचल .....
जीवन पुष्प चढ़ा चरणों में, मांगे मातृभूमि से यह वर
तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे न रहे ।
भारत माता तेरा आंचल ......













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