अमृत वचन - श्री गुरूजी




प्रचलित प्रेरक कथन एवं सुविचार  

परम पूज्य श्री गुरु जी ने कहा है -

                   "यह राष्ट्र हजारों वर्षों से हिंदू राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र बनाना नहीं है, इसे स्थापित नहीं करना है, इसकी घोषणा भी नहीं करनी अपितु हिंदू राष्ट्र का सर्वांगीण विकास करना है।"
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सुभाषित - गोपाल सांघिक: कृष्णो




[2]

सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे - 



"गोपाल सांघिक: कृष्णो,
रामो वानर संघिक:।
सद्भुक्षु सांघिको बुद्धो, 
महात्मानो हि संघिक:।।"

अर्थात

"श्री कृष्ण ने गोपालको का संगठन किया, 
श्री राम ने वानरों का संगठन किया। 
भगवान बुद्ध सद्भिक्षुओं के संगठन कर्ता बने।
इस प्रकार महात्मा संगठन कर्ता ही होते हैं।"



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झबरेड़ा नगर पद संचलन 2018



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर मे पद संचलन के कुछ ग्रुप  फोटो 
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर मे पद संचलन के कुछ ग्रुप  फोटो 
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 

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झबरेड़ा नगर अभ्यास वर्ग 2018


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर मे नगर अभ्यास  वर्ग फोटो 
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर  
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 

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झबरेडा नगर सहभोज एवं बाल शिविर 2018



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर मे नगर सहभोज एवं बल शिविर वर्ग फोटो 
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर  
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 

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झबरेडा नगर देव दर्शन एवं शाखा दर्शन 2018


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर मे देव दर्शन एवं शाखा दर्शन फोटो 
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झबरेड़ा नगर  
नगर - झबरेड़ा जिला - रुड़की विभाग - हरिद्वार प्रान्त - उत्तराखंड 

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भारत माँ के चरण कमल में - MP3


भारत माँ के चरण कमल पर तन मन धन कर दे न्यौछावर
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सुभाषित - विरोधिनोअपि श्रोतव्यं




[1]
सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे - 



विरोधिनोअपी श्रोतव्यं, 
आत्मलीनतयामतम |
तात्कालम न विरोद्धव्यम, 
यथाकालं तू खंडयेत ||



***अर्थ***

विरोधियों के विचार को भी 

आत्मीयतापूर्वक सुनना चाहिए 
और तत्काल उसका विरोध
नहीं करना चाहिए| 
बाद  में उचित समय पर
बात का खंडन करना चाहिए |





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