सुभाषित - गोपाल सांघिक: कृष्णो




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सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे - 



"गोपाल सांघिक: कृष्णो,
रामो वानर संघिक:।
सद्भुक्षु सांघिको बुद्धो, 
महात्मानो हि संघिक:।।"

अर्थात

"श्री कृष्ण ने गोपालको का संगठन किया, 
श्री राम ने वानरों का संगठन किया। 
भगवान बुद्ध सद्भिक्षुओं के संगठन कर्ता बने।
इस प्रकार महात्मा संगठन कर्ता ही होते हैं।"



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