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सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे -
"गोपाल सांघिक: कृष्णो,
रामो वानर संघिक:।
रामो वानर संघिक:।
सद्भुक्षु सांघिको बुद्धो,
महात्मानो हि संघिक:।।"
महात्मानो हि संघिक:।।"
अर्थात
"श्री कृष्ण ने गोपालको का संगठन किया,
श्री राम ने वानरों का संगठन किया।
भगवान बुद्ध सद्भिक्षुओं के संगठन कर्ता बने।
इस प्रकार महात्मा संगठन कर्ता ही होते हैं।"



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