सुभाषित - विदेशेषू धनं विद्या



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सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे - 


विदेशेषू धनं विद्या, 
व्यसनेषू धनं मति:।
परलोके धनं धर्म, 
शीलं सर्वत्र वै धनं।।

***अर्थ***

विदेश में विद्या ही धन है, 
संकट में बुद्धि ही धन है।
 मृत्यु के उपरांत धर्म ही धन है।
 लेकिन अच्छा आचरण सभी जगह धन है।
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जय मातृभूमि जीवन भर


जय मातृभूमि जीवनभर


जय मातृभूमि जीवनभर 
निशि दिन तेरा ही गुण गाएं
फिर भी तेरा पार नहीं हम पाए 

सबसे ऊंचा मस्तक तेरा, 
चरणों में सागर का घेरा 
दसों दिशाएं सांझ सवेरे,
 तुझको शीश झुकाए 
फिर भी तेरा पार नहीं हम पाएं ।१

तूने दिया खेलता बचपन,
फिर अथाह  बलशाली यौवन  
शत-शत जीवन तेरी सेवा, 
का हम अवसर पाए 
फिर अभी तेरा पार नहीं हम पाए ।२

भौतिकता में जब जग मोहित,
 तू थी  दर्शन से आच्छादित
 समय-समय पर ईश मुखों से,
 तूने धर्म उपदेश कराए
 फिर भी तेरा पार नहीं हम पाएं ।३

जय मातृभूमि जीवनभर 
निशि दिन तेरा ही गुणगान
फिर भी तेरा पार नहीं हम पाए 
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बोधकथा - रहट की टक टक


रहट की टक टक



                                    एक घुड़सवार था घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहा था। धूप तेज थी। वह घोड़े को तेज दौड़ा रहा था। घुड़सवार को प्यास लगी। घोड़ा भी थक गया था। काफी दूरी पर घुड़सवार ने एक रहट चलते देखा। घुड़सवार ने कहा, अच्छा हुआ। चलो रहट से पानी पी ले और घोड़े को भी पानी पिला दे। वह उस स्थान पर जहां रहट चल रही थी पहुंचा। घोड़े को बांध दिया। पहले उसने अपने हाथ पैर धोए और मुंह भी धोया और पानी पिया। उसने घोड़े को लाकर पानी के पास खड़ा किया। घोड़े ने जैसे ही पानी में मुंह लगाया रहट की बाल्टी बोली 'खट'। घोड़ा उस और चौकन्ना हो कर देखने लगा।
                              घोड़े की आदत थी आवाज सुनकर चौकन्ना होना। जब घोड़े ने पानी में मुंह लगाया रहट की बाल्टीयों की टक-टक, खट-खट के कारण उधर ही चौकन्ना होकर देखता था। घुड़सवार ने रहट चलाने वाले से कहा भाई रहट चलाना बंद कर दो ताकि मेरा घोड़ा पानी पी ले। उसने रहट चलाना बंद कर दिया तो पानी आना बंद हो गया और जो पानी नाली में था वह भी बह गया घोड़ा पानी नहीं पी सका।
                                 कई बार रहट बंद करने के बाद भी जब घोड़ा पानी नहीं पी सका तो रहट वाले ने कहा "आपके घोड़े की आदत आवाज सुनकर चौकन्ना होने की है। रहट की आदत टकटक करने की है।" यदि घोड़े को पानी पीना है तो उसे अपनी आदत में बदल करना होगा। आवाज सुनकर चौकन्ना होने की आदत उसे छोड़नी होगी। टक-टक होता रहे तो फिर भी वह पानी पीता रहे यदि ऐसा हुआ तो तभी घोड़ा पानी पी सकेगा अन्यथा प्यासा का प्यासा ही रहेगा।
                              इसलिए कार्य में यदि कोई छोटी-मोटी परशानी (खटर पटर) होती है, तो परेशान नहीं होना चाहिए। कार्य चल रहा है तो कुछ ना कुछ परेशानी तो आयेगी ही।

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वीर हकीकत राय


वीर हकीकत राय





                                              शाहजहां के शासनकाल में पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) के प्रसिद्ध शहर सियालकोट के खत्री परिवार में एक बालक ने 1619 को जन्म लिया। बच्चे की श्री माता गोरा देवी और पिता श्री भागवत जी थे। बालक का नाम हकीकत राय रखा गया। 5 वर्ष की आयु में एक विद्वान ब्राह्मण के पास हिंदी, संस्कृत पढ़ने भेजा गया। छोटी आयु में ही अच्छी धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के कारण हिंदुत्व के संस्कार उसमें कूट कूट कर भर गए थे। तत्कालीन प्रथा के अनुसार हकीकत राय का विवाह 19 वर्ष की छोटी आयु में ही बटाला के एक सिख श्री किशन सिंह की पुत्री लक्ष्मी देवी के साथ हो गया विवाह के बाद पिताजी ने हकीकत राय को फारसी (उस समय की राजभाषा) पढ़ने के लिए मौलवी के पास भेज दिया। वहां और भी बच्चे पढ़ते थे और वे सभी मुसलमान थे।
                                1 दिन मौलवी कहीं बाहर गया हुआ था, उसकी अनुपस्थिति में शेष बच्चे खेलने कूदने तथा शोर मचाने लगे। हकीकत राय इस खेल में सम्मिलित नहीं हुआ और पढ़ने लगा इस पर सभी लड़के मिलकर उसे तंग करने लगे। उन्होंने हिंदू धर्म की निंदा करना प्रारंभ कर दिया और मां दुर्गा के प्रति अपशब्दों का प्रयोग भी करने लगे। धार्मिक हकीकत अपमान को सहन न कर सका और उत्तेजित होकर उसने भी मुसलमानों के पैगंबर की लड़की बीबी फातिमा के लिए उन्ही शब्दों को दोहराने की चेतावनी दी।
                                      मौलवी के वापस आने पर मुसलमान लड़कों ने हकीकत राय की शिकायत की कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है। मौलवी के पूछने पर हकीकत ने निर्भयता से सारी बात सच-सच बता दी और कहा कि इन लड़कों ने तो उनकी देवी मां दुर्गा को गालियां दी थी किंतु मौलवी ने उसकी सभी बातें अनसुनी कर उसको थप्पड़ और लात घुसे मार कर बेहोश कर दिया। होश में आने पर मौलवी हकीकत राय को काजी के पास ले गया।
                                   काजी ने हकीकत से कहा तुमने बहुत बड़ा अपराध किया है। इसका एक ही प्रायश्चित है कि तुम इस्लाम स्वीकार कर मुसलमान हो जाओ नहीं तो बीबी फातिमा को गाली देने के अपराध में तुम्हारा सिर काट दिया जाएगा। हकीकत ने मुस्कुराकर कहा कि मैं अपने प्राणों से प्यारे हिंदू धर्म को तिलांजलि नहीं दे सकता। मौत का भय दिखाकर आप मुझे विचलित नहीं कर सकते क्योंकि हकीकत को ही तुम्हारी तलवार काट सकती है, आत्मा को नहीं। मेरा धर्म कहता है कि आत्मा अमर है। एक बालक के मुख से ज्ञान और स्वाभिमान की बातें सुनकर काजी आश्चर्यचकित रह गया।
                                  यदि तुम मुसलमान हो जाओ तो तुमको इतना धन दिया जाएगा की संपूर्ण जीवन भोग विलास में व्यतीत करोगे काजी ने उसे लालच देना चाहा। मैं मुसलमान बन सकता हूं यदि आप मुझे विश्वास दिला दें कि मुसलमान बन जाने से मैं अमर हो जाऊंगा। यह कैसे हो सकता है? जो इस संसार में आया है वह एक ना एक दिन तो मरेगा ही - काजी ने कहा। मरना ही है तो उससे कैसा डर। मुसलमान बन जाने पर भी मैं अमर नहीं हो सकता तो फिर मुसलमान बनने से क्या फायदा। अंत में अपने को पराजित अनुभव करते हुए काजी ने कुरान की शरीयत का नाम लेकर हकीकत को कोड़े लगाए और हथकड़ियों से जकड़ कर कारागार में डाल दिया।
                                   इस समाचार को सुनकर माता पिता काजी के पास आए और काजी से क्षमा मांगते हुए कहा यह बच्चा है, गलती से इसके मुंह से अपशब्द निकल गए होंगे। इस पर भी काजी को दया नहीं आई और उसने पूर्व दी सजा को बनाए रखा। माता ने ममत्व के वशीभूत होकर हकीकत से क्षमा मांगने एवं मुसलमान बन जाने को कहा। इस पर हकीकत ने माता से कहा- माता तूने ही तो मुझको प्राचीन गाथाएं सुना कर धर्म के मर्म को समझाया था। मैं इस पवित्र कार्य से कदापि पीछे नहीं  हटूंगा। धर्म के लिए एक प्राण तो क्या यदि मुझे हजार प्राण भी न्योछावर करने पड़े तो मैं प्रसन्नता-पूर्वक तैयार हूं। यह पाठ तुम्हारी गोदी में ही बैठकर तो सीखा है।
                                 मां की आंखों में आंसू आ गए वह निरुत्तर थी। नगर के सभी हिंदू एकत्रित होकर नगर प्रमुख अमीर बेग के पास गए और हकीकत को बच्चा जानकर क्षमा करने को कहा। अमीर बेग ने स्वयं निर्णय न देकर मुकदमा लाहौर के मुख्य काजी के पास भेज दिया। उन दिनों दिल्ली में बादशाह मोहम्मद शाह का राज्य था। उस सुबह का सूबेदार खान बहादुर जकारिया खान था। सभी जगह मुस्लिम धर्मांधता का बोलबाला था। मुकदमा लाहौर के मुख्य काजी के न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, लेकिन परिणाम वही इस्लाम स्वीकार करो या मृत्युदंड।
                             हकीकत ने काजी को कहा प्रभु ने मुझे हिंदू घर में जन्म दिया है और आपको मुस्लिम घर में इसलिए आपका मुझे इस्लाम स्वीकार करने के लिए बातें करना ईश्वर के कार्य में हस्तक्षेप है। भूलिए मत जो कोई ईश्वर के कार्य में हस्तक्षेप करता है, काफिर वही है मैं नहीं। हकीकत की पत्नी भी न्यायालय में उपस्थित थी उसने भी मुसलमान बन प्राणों को बचाने की प्रार्थना की, तो हकीकत राय ने कहा तुम्हारा मस्तक तो गर्व से ऊंचा होना चाहिए कि तुम्हारा पति अपने धर्म पर अडिग रहा है।
                                 अंत में पूर्व दंड के अनुसार एक खुले मैदान में हजारों महिला पुरुषों की भीड़ के बीच सन 1734 बसंत पंचमी के दिन काजी के आदेश से जल्लाद ने उस वीर बालक का तलवार से शीश काट दिया। लाहौर से लगभग 5 किलोमीटर दूर रावी नदी के तट पर खोजें शाह गांव के निकट चंदन की चिता बनाकर वीर बालक का अंतिम संस्कार किया गया। बाद में वहां समाधि बनाई गई। भारत विभाजन के बाद समाधि स्थल बना कर वहां प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के दिन मेला लगता है।
                               बलिदानी वीर हकीकत की पत्नी बाद में अपने पिता के घर बटाला आ गई और माता-पिता को समझाने के बाद बटाला में ही आत्मोत्सर्ग किया। आज भी प्रतिवर्ष वहां पर मेला लगता है वीर हकीकत का बलिदान अलौकिक और अद्वितीय है। वीर हकीकत ने हंसते-हंसते धर्म के लिए अपना बलिदान देकर समाज में नवचेतना का संचार किया।


*जय श्री राम*

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स्वस्थ रहने के लिए कुछ जरूरी बातें - जीवन पद्धति




स्वस्थ रहने के लिए कुछ जरूरी बातें

1. घर में शौचालय और स्नानघर अलग रहे तो अच्छा।
2. हाथ पैर मुंह धोकर ही खाना।
3. हर निवाले को धीरे-धीरे चबाकर ही खाना।
4. भोजन या अल्पाहार के बाद उपयोग किए बर्तनों को तुरंत मांज कर रखना। बिना धोए फिर से उपयोग में नहीं लाना।
5. घर में उपयोग होने के बाद जल निकास की योग्य व्यवस्था रहे।
6. शाम को बच्चों का खेलना अनिवार्य रहे। बच्चे अनेक तरह तरह के खेल खेलें। तब ही शरीर के सभी अंग क्रियाशील रहेंगे।
7. उंगलियों के नाखूनों को चबाना नहीं चाहिए।
8. हर दिन कम से कम 30 मिनट के आयाम करना चाहिए।
9. प्रातः बेड कॉफी या बेड टी की आदत ठीक नहीं है। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
10. खड़े-खड़े रसोई बनाना शरीर के लिए हानिकारक है इससे कमर दर्द, स्याटिका, संधिवात इत्यादि रोग होते हैं।
11. मेज के सामने बैठकर खाने के बारे में भी सोचना आवश्यक है। जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना अति उत्तम एवं आरोग्य दायक है। खड़े-       खड़े खाना भी ठीक नहीं है।
12. घर में कोई बीमार पड़े तो डरना नहीं। प्रारंभिक चिकित्सा घर में सावधानी से करें।
13. रोगियों या बीमारों की सेवा, उपचार, पथ्य पालन इत्यादि प्रेम से करने  का अभ्यास हो।
14. हर नौजवान को वश में एक दो बार रक्तदान करना चाहिए।
15. मृत्यु के बाद नेत्रदान करने के बारे में सब जागृत रहे।
16. मृत्यु अनिवार्य है। इसको समझ कर किसी को भी मृत्यु से डरना नहीं चाहिए।
17. शौचालय अपने देश के तरीके का रहे। कमोड बुजुर्ग और रोगियों को ठीक रहेगा, स्वस्थ युवकों के लिए नहीं है।
18. चीनी के स्थान पर गुड खाना अच्छा होता है।
19. सफेद नमक नहीं खाना चाहिए इसके स्थान पर सेंधा नमक व काले नमक का उपयोग करना चाहिए।
20. मिर्ची के स्थान पर काली मिर्ची खाना अच्छा है।
21. बाहर से घर वापस आने पर तुरंत हाथ पांव धोने चाहिए।


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सञ्चलन गणगीत गीत - संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढ़े चलो



***सञ्चलन गीत***

संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढ़े चलो,
 भला हो जिसमे देश का वो काम सब किए चलो ||

 युग के साथ मिलकर सब कदम बढ़ाना सीख लो
 एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो
 भूलकर भी मुख से जाति पंथ की ना बात हो
 भाषा प्रांति के लिए कभी ना रक्तपात हो
 फूट का भरा घड़ा है फोड़कर बढ़े चलो ||१||
 भला हो जिसमे देश का वो काम सब किए चलो

 आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार
 हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार
 कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुराते सब सहेंगे हम
 देश के लिए सदा जियेंगे और मरेंगे हम
 देश का ही भाग्य अपना भाग्य है यह सोच लो ||२||
भला हो जिसमे देश का वो काम सब किए चलो
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अमृत वचन - श्री गुरूजी




प्रचलित प्रेरक कथन एवं सुविचार  

परम पूज्य श्री गुरु जी ने कहा है -

                   "यह राष्ट्र हजारों वर्षों से हिंदू राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र बनाना नहीं है, इसे स्थापित नहीं करना है, इसकी घोषणा भी नहीं करनी अपितु हिंदू राष्ट्र का सर्वांगीण विकास करना है।"
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सुभाषित - गोपाल सांघिक: कृष्णो




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सुभाषित दो शब्दों सु + भाषित से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सुन्दर भाषा में कहा गया| सुभाषित जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों के भण्डार हैं जिनमे सुखी और आदर्श जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई है | जैसे - 



"गोपाल सांघिक: कृष्णो,
रामो वानर संघिक:।
सद्भुक्षु सांघिको बुद्धो, 
महात्मानो हि संघिक:।।"

अर्थात

"श्री कृष्ण ने गोपालको का संगठन किया, 
श्री राम ने वानरों का संगठन किया। 
भगवान बुद्ध सद्भिक्षुओं के संगठन कर्ता बने।
इस प्रकार महात्मा संगठन कर्ता ही होते हैं।"



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